🍅 मुझे तुम पसन्द हो इसलिए नही की तुम खूबसूरत हो ....🦋
इसलिए कि तुममें जो ठहराव है 🦋 वो मुझे सुकून देता है ....
तुम्हारा साथ होना या न होना मायने नही रखता ....
मायने रखता है तुम्हारा मुझसे बिना मिले ही मुझे महसूस कर लेना ....
तुम्हारी ख़ामोशी अक्सर गुफ्तगू करती है मुझसे ....
तुम्हारा मुझसे बात करना ही मेरे दिल का आलम बदल देता है ....
जरूरी तो नही न मेरा तुम्हें पा लेना ही मेरा इश्क़ मुक़्क़म्मल करे ....
शायद मेरे लिए तुम्हारा पाना जरूरी नही ....
तुम्हारा होना ही काफी है ....
देखो न ....
ये तुम्हारे ख़्याल भी कितने बदमाश से हैं ....
जब देखो तब मेरे ज़हन में चले आते हैं वो भी बिना दस्तक दिये ....
आहट तक नहीं होने देते ये अपने आने की ....
मेरी ज़िंदगी में तुम्हारे ये ख़्याल ऐसे घुल गए हैं जैसे में और तुम एक दूसरे में गुम होते हैं ....
दुनिया भर की ख़्वाहिशें एक तरफ़ और मेरा तुम हो जाना एक तरफ़ .🦋
*ज़मीन और मुक़द्दर*
*की एक ही फितरत है*
*जो भी बोया है वो*
*निकलना तो तय है !!*
*✔️सुप्रभात नमस्कार*
एक स्त्री के योनि से जन्म लेने के बाद उसके वक्षस्थल से निकले दूध से अपनी भूख
प्यास मिटाने वाला इंसान बड़ा होते ही औरत से इन्हीं दो अंगो की चाहत रखता है,
और अगर असफल होता है, तो इसी चाहत में वीभत्स तरीको को अंजाम देता है...!
बलात्कार और फिर हत्या...!
जननी वर्ग के साथ इस तरह की मानसिकता क्यूँ...?
वध होना चाहिए ऐसी दूषित मानसिकता के लोगों का.....
मेरे दूध का कर्ज़ मेरे ही खून से चुकाते हो
कुछ इस तरह तुम अपना पौरुष दिखाते हो
दूध पीकर मेरा तुम इस दूध को ही लजाते हो
वाह रे पौरुष तेरा तुम खुद को पुरुष कहाते हो
हर वक्त मेरे सीने पर नज़र तुम जमाते हो
इस सीने में छुपी ममता क्यों देख नहीं पाते हो
इक औरत ने जन्मा ,पाला -पोसा है तुम्हें बड़े होकर ये बात क्यों भूल जाते हो
तेरे हर एक आँसू पर हज़ार खुशियाँ कुर्बान कर देती हूँ मैं
क्यों तुम मेरे हजार आँसू भी नहीं देख पाते हो
हवस की खातिर आदमी होकर क्यों नर पिशाच बन जाते हो
हमें मर्यादा सिखाने वालों तुम अपनी मर्यादा क्यों भूल जाते हो
हमें मर्यादा सिखाने वालों तुम अपनी मर्यादा क्यों भूल जाते हो...!